सर्वे नंबर 80 अहस्तांतरित भूमि पर बाप बेटे ने मिलकर किया गरीबो की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा फिर करोड़ो की भूमि को कर दिया विक्रय…

दिलीप मालवीय, झाबुआ

      ग्राम बामनिया प.ह.न. 1 में रतलाम रोड स्थित शासकीय भुमि भू राजस्व संहिता लागू होने के बाद वर्ष 1959-60 से शासकीय आबादी के रुप में दर्ज हो गई थी। जिसका पुराना सर्वे नंबर 93 रकबा 9-02 राजस्व खसरा खाता क्रमांक के रूप में दर्ज था।
वही कालम नंबर 18 में बंदोबस्त वर्ष-1959-60 के समय समरथमल आ. हमीरमल जाति महाजन जो व्यापारी होकर पेटलावद के निवासी गण रहे थे जिनकी असल जाति जैन थी। उन्होंने अपना कब्जा इस भूमि पर कर लिया था। लेकिन राजस्व विभाग ने अतिक्रमण के रूप में दर्ज कर दिया था । समरथमल के पिता हमीरमल घासीराम जाति महाजन और मांगीलाल मेहता के दादाजी को शासन ने इसी सर्वे नंबर 93 के समीप पुराना सर्वे नंबर 85 पर प्रेसिंग फैक्ट्री (उद्योग) खोलने के लिए लीज पर भूमि आवंटित की थी। लेकिन व्यापारी बनकर आये इन कतिपय लोगों ने स्कूल मद तक कि भुमि हथीया ली जब कि इस बड़े रकबे की भूमि पर यहां के सभी जातियों के स्थानीय निवासियों का बराबर का हक कहा था। और अवैध कब्जा करने वाले पेटलावद के निवासीगण थे।

पहले से बाहरी लोगों का था अवैध कब्जा…

पुराने रिकार्ड के अनुसार उक्त भूमि के पुराने वर्ष-1965-66 खसरा पांचशाला मैं सर्वे नंबर 93 कालम नंबर 12 में स्कुल हेडमास्टर, सरकारी पानी का कुआं, समरथमल निवासी पेटलावद व अन्य आदि का नाम अतिक्रमण के रूप मे कब्जा था।

सेटलमेंट के पश्चात अवैध जिनिंग फैक्ट्री कर दी थी खड़ी…

वर्ष-1974-75 सेटलमेंट पश्चात खसरा खाता रिकॉर्ड अनुसार नवीन सर्वे नंबर 80 आबादी मद की भूमि पर विपक्षियो ने अवैध रूप से कब्जा कर वर्ष 1983-84 में अवैध तार फैंंसीग, जिनिंग फैक्ट्री का फाउंडेशन व जिनिंग फैक्ट्री खसरा खाता रिकॉर्ड के अनुसार तैयार कर खोल दी थी। और धीरे-धीरे स्कूल और उसके पास लगी भूमि पर इन कतिपय लोगों द्वारा कब्जा जमा लिया था।

लगातार बदलाते रहे रिकॉर्ड में नाम… और कर दिया सरकारी आबादी भूमि पर विक्रय का खेल…

वर्ष-1990-91 में समरथमल के बाद कालम नंबर 12 मांगीलाल समरथमल जाति महाजन का नाम अवैध अतिक्रमणकर्ता के रूप में दर्ज किया गया था। जिसमें स्कूल हेडमास्टर मद कुवा मद व संपूर्ण भूमि के भाग को धीरे-धीरे मांगीलाल जाति महाजन जिसकी असल जाति जैन है, और इसके पुत्र संतोष मेहता ने धारा 165 , 110 ,का गलत तरीके से इस्तेमाल कर विक्रय कर दिया। जब कि यह कतिपय लोग मुल रुप से ग्राम बामनिया के निवासी ही नहीं रहे थे। और आबादी अधिनियम 1959–60 का उल्लंघन विपक्षियों द्वारा किया गया । साथ ही पंचायती राज स्वराज अधिनियम 1993-94 का भी खुल्ला उल्लंघन इन दोनो ने मिलकर किया।

खरीददार को रखा गफलत में…

सर्वे नंबर 80 की भूमि एक बड़े रकबै की भूमि राजस्व रिकार्ड में दर्ज है । और इसी रकबै पर पूरा खेल इन दोनों ने मिलकर अवैध विक्रय के रूप में खेला । जिन लोगों को इस सर्वे नंबर की भूमि धारा 165 और 110 में की है। उन खरीददारों को यह नहीं मालूम की असल में इस भूमि का मालिक राजस्व विभाग है। कई खरीदारों ने इस भूमि के छोटे-बड़े भूखंडों के रूप में खरीदी के नाम पर इन कतिपय लोगों को मुंह मांगी कीमत दी है। जबकि खरीदारों को यह नहीं बताया कि इस भूमि पर हमारा नाम अतिक्रमण के रूप में दर्ज है। और यह भूमि आबादी शासकीय भूमि होकर स्कूल मद कुआं मद की भी भूमि है। ऐसे ही मामले ग्राम सारंगी, झकनावदा और कई जगह पर चल रहे हैं जिसमें आबादी मद की भूमि की रजिस्ट्री अवैध रूप से करवाई जा रही है।

वर्तमान बेरोक टोक चल रहा निर्माण कार्य…

इसी सर्वे नंबर पर यहां के कुछ कतिपय जीएसटी चुराने वाले व्यापारी ने खरीदी बिक्री की है। और बड़ा माल गोदाम पूर्व में बना चुके हैं और वर्तमान में भी निर्माण कार्य चालू है। जिस पर देखना यह होगा कि राजस्व विभाग अपनी जमीन को कैसे बचाता है और चालू निर्माण कार्य को पूरा होने से पहले केसै रोकता है।