एक तरफ सरकार गरीबों के लिए योजना बना रही हे जिससे आम जनता को लाभ मिल सके वो हर सुविधाएं मिले जो बड़े हॉस्पिटल बड़े स्तर पर लोगो को मिलती हे… परन्तु झाबुआ जिले के हाल कुछ इतने बेहाल है कि यहां कोई किसी की सुनने वाला नहीं हे… प्रशाशन लाख अपनी प्रशंसा के दावे करता हे परंतु हकीकत कुछ ओर ही बया कर रही हे…
ताजा मामला जिला अस्पताल झाबुआ का हे जहा एक युवक को पांव में फ्रैक्चर हुआ जिसके इलाज के लिए परिजन उसे जिला अस्पताल झाबुआ लाए जहां युवक के इलाज के लिए उसे भर्ती किया गया… जहां इलाज के नाम पर उसे पट्टा तो चढ़ा दिया परंतु उसके बाद मारी 6 दिन तक वार्ड में भर्ती था पर उसे कोई भी देखने आज तक नहीं आया… ओर तो ओर दवाई के नाम पर मरीज को एक सिरप की बोतल दे दी गई… क्या एक सिरप बोतल में मरीज का इलाज हो जाएगा… न दर्द की दवा दी न उसे आराम मिलने की दवा दी आखिर यह लापरवाही क्यों…
परिजन पहुंचे जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पास…
इस पूरे मामले में परिजन जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पास अपनी आप बीती लेकर पहुंचे… परिजन ने अपनी बात बताना शुरू की ओर कहा कि क्या हमारे बच्चे को मरने के बाद घर ले जाएंगे हमारे बच्चे को भरती किए हुए 6 दिन हो गए और इलाज के नाम पर एक सिरप दे दिया क्या इस तरह से इलाज होगा… जिस पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी बोले आप मेरे पास आए हे अब में मामले को दिखवाता हु… जिस पर परिजन बोले आप दिखवाएंगे तो इतने दिन कोई आया क्यों नहीं… आखिर में जिला स्वास्थ्य अधिकारी कही न कही अपनी जिम्मेदारियों से भागते हुए नजर आए…
लापरवाह हे जिम्मेदार…?
इससे पहले भी जिले में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हे परंतु जिला स्वास्थ्य अधिकारी साहब हे जो वो कहेंगे वहीं होगा कि तर्ज पर कार्य होगा… इतने सारे मामले उजागर होने के बाद भी आज तक कोई एक्शन नहीं लेना कही न कही दाल में कुछ काला नहीं पूरी दाल ही काली नजर आ रही हे…
साहब के यह होते हे जवाब…
यह साहब मीडिया से इस तरह भागते हे कि जब मीडिया इनसे कोई मामले में बात करना चाहती हे तो साहब कहते हे अभी बाहर हु मीटिंग में हु बस आ रहा हु ओर आखरी में कहते हे में इंदौर निकल गया हु… आखिर साहब अगर आप ओर आपका विभाग दूध का धुला हुआ हे तो फिर मीडिया से दूरी क्यों…?