झाबुआः जिले के ग्राम कल्याणपुरा में जल संकट गहराता जा रहा है। गाँव में स्थित गुलाबी नदी के सूखने और वर्षों से क्षतिग्रस्त चेक डैमों की मरम्मत न होने के कारण जल संरक्षण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे न केवल भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है, बल्कि सिंचाई, पेयजल और पशुपालन भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
पाँच वर्षों से क्षतिग्रस्त हैं चेक डैम, बारिश का पानी बह जाता है व्यर्थ
ग्राम कल्याणपुरा में स्थित गुलाबी नदी पर बने चेक डैम पिछले पाँच वर्षों से क्षतिग्रस्त हैं। इनमें से एक प्रमुख डैम झाबुआ-पेटलावद बायपास पर स्थित है, जिसमें अत्यधिक गाद जमा हो चुकी है और इसकी जल संग्रहण क्षमता समाप्त हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि मॉनसून के बाद भी इस डैम के गेट नहीं लगाए जाते, जिससे पानी व्यर्थ बह जाता है।
क्षेत्र में हर साल 700-900 मिमी बारिश होती है, लेकिन जल संरचनाओं की खराब स्थिति के कारण अधिकांश वर्षा जल व्यर्थ बह जाता है और भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। गाँव के कुएँ और हैंडपंप सूख चुके हैं, जिससे पेयजल संकट भी बढ़ रहा है।
भूजल पर बढ़ती निर्भरता, गिरता जल स्तर
गुलाबी नदी के सूखने के कारण गाँव के किसान पूरी तरह भूजल पर निर्भर हो चुके हैं। लगातार जल दोहन के कारण भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है, जिससे बोरवेल और कुएँ भी सूख रहे हैं। गाँव में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घटने से मक्का, गेहूं, दलहन और सब्जियों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। नदी में वर्षों से गाद निकासी नहीं हुई, जिससे इसकी जल धारण क्षमता भी काफी कम हो गई है।
कृषि और पशुपालन पर असर, बढ़ रहा पलायन
सिंचाई के पानी की कमी के कारण गाँव की करीब 75% कृषि भूमि असिंचित रह जाती है। इससे किसानों की आय में गिरावट आई है, और कई परिवार रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
पशुपालन भी प्रभावित हुआ है, क्योंकि पानी की अनुपलब्धता के कारण चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। कई पशुपालकों ने मजबूरी में अपने मवेशियों को बेच दिया है।

ग्रामीणों की माँग जीर्णोद्धार और नए चेक डैम का निर्माण हो
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही क्षतिग्रस्त चेक डैमों की मरम्मत और नए चेक डैर्मा का निर्माण नहीं किया गया, तो गाँव में जल संकट और गहरा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से माँग की है कि गुलाबी नदी पर कम से कम तीन नए चेक डैम बनाए जाएँ और पुराने डैमों की गाद निकासी कर उन्हें फिर से उपयोगी बनाया जाए।
किन योजनाओं से हो सकता है समाधान ?
विशेषज्ञों के अनुसार, इन कार्यों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), जल शक्ति अभियान और मुख्यमंत्री जल संरक्षण योजना के तहतपूरा किया जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते आवश्यक कदम उठाए, तो गाँव को जल संकट से बचाया जा सकता है।
ग्रामीणों का श्रमदान करने का संकल्प
ग्रामवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त जल संरचनाओं की मरम्मत और नए चेक डैमों के निर्माण के लिए कार्य शुरू किया जाए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे श्रमदान करने के लिए तैयार है, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से योजनाओं का सही क्रियान्वयन जरूरी है। अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में जल संकट और विकराल रूप ले सकता है।
गाँव का नक्शा और क्षतिग्रस्त डैमो की अवस्थिति

नीली रेखा नदी मार्ग को दर्शा रही है और नदी मार्ग में बनाए गए तीन डैमो की स्थिति बात रही है।





