सवाल सिस्टम पर…? सिस्टम से हार गया गरीब परिवार… हॉस्पिटल से घर ले गए घायल बच्चे को… परिवार लगा पेसो के प्रबंधन में… प्राइवेट हॉस्पिटल में कराएगा इलाज… क्या इतना लापरवाह हे सिस्टम…?
सिस्टम कितना लापरवाह हे इसकी बानगी आपको झाबुआ में देखने मिलेगी… एक गरीब परिवार का आठ माह का बच्चा छत से गिर जाता हे उसे घायल अवस्था में इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया जाता हे… जिसमे उसे बताया जाता हे कि इसे फैक्चर हे जिसके इलाज के लिए उसे भर्ती किया जाता हे करीब सात दिन बीतने के बाद भी उसका सही से इलाज नहीं किया जाता हे… सिर्फ नाम मात्र की एक सीसी दवाई के रूप में देदी जाती हे… जिसको लेकर बच्चे के माता पिता लगातार जिम्मेदारों से बात करते रहे ओर बोले कि साहब हमारे बच्चे का इलाज कब करोगे क्या हमारे बच्चे को करने के बाद घर ले जाएंगे… परंतु लापरवाह सिस्टम ने एक न सुनी और आखिरकार पीड़ित माता पिता अपने बच्चे को वापिस घर ले गए और अब पैसे का बंदोबस्त कर रहे हे और जैसे ही पेसो का इंतजाम हो जाएगा तो उसे इलाज के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाएंगे… अब जिम्मेदार भले ही उस पीड़ित के पास जाए और कोई ड्रामा कर फिर से वापिस उसे हॉस्पिटल ले आए परंतु फिलहाल वह माता पिता बच्चे को लेकर घर पहुंच चुके हे… अब दिख रहा हे सिस्टम कितना लापरवाह हे।
सिस्टम तो लापरवाह हे साहब…
प्रशासन दावे तो बहुत करता हे परंतु सिस्टम तो लापरवाह हे… अगर इस बच्चे को यही डाक्टर इनके निजी क्लिनिक पर इलाज करते तो इसका इलाज कब से हो जाता… पैर की सूजन का बहना बनाकर एक सीसी देना कहा का न्याय हे… आदिवासी समाज के भोले भाले लोगों को आप लोग कब तक इस तरह से बहाने बनाकर झूठ बोलते रहोगे… क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं थी क्या सरकार आपको तनख्वाह नहीं देती… थोड़ी सी मानवता भी दिखा दिया करो साहब… उस आठ महीने के मासूम के साथ जो किया हे वो तो ऊपर वाला देख ही रहा हे… जमीन वाले कितना ही आपका साथ दे देंगे ऊपर वाला साथ नहीं देगा…