थांदला – विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर जिले में मानवता, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिला। जिला प्रशासन द्वारा संचालित “जीवन धारा अभियान – एक बूंद उम्मीद की” के अंतर्गत सिविल अस्पताल थांदला में विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए रक्तदान किया और जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने रक्तदाताओं का मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मान किया। उन्होंने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि समाज में ऐसे लोग ही मानवता की सच्ची मिसाल होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के जीवन की रक्षा के लिए आगे आते हैं।
रक्तदान है सबसे बड़ा मानव सेवा का माध्यम
कलेक्टर डॉ. भरसट ने कहा कि रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय आवश्यकता की पूर्ति नहीं, बल्कि यह मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। एक यूनिट रक्त किसी गंभीर मरीज, दुर्घटना पीड़ित, गर्भवती महिला या सिकल सेल रोगी को नया जीवन प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने वाला व्यक्ति किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में आशा की नई किरण बनता है।
उन्होंने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि समाज में रक्तदान की संस्कृति विकसित होना अत्यंत आवश्यक है। जब तक लोग स्वयं आगे बढ़कर रक्तदान नहीं करेंगे, तब तक रक्त की आवश्यकता को पूरी तरह पूरा नहीं किया जा सकता।
सिकल सेल उन्मूलन के लिए जनभागीदारी जरूरी
विश्व सिकल सेल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कलेक्टर ने कहा कि झाबुआ जनजातीय बहुल जिला है, जहां सिकल सेल बीमारी के मामले अपेक्षाकृत अधिक पाए जाते हैं। यह बीमारी कई परिवारों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। ऐसे में जागरूकता, समय पर जांच और रक्त की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश को सिकल सेल रोग से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल रोगियों को कई बार नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान उनके जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है।
रक्तदान को लेकर भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत
कलेक्टर डॉ. भरसट ने कहा कि आज भी समाज में रक्तदान को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां व्याप्त हैं। अनेक लोग यह मानते हैं कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह पूरी तरह गलत धारणा है।
उन्होंने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। रक्तदान के बाद शरीर कुछ ही दिनों में रक्त की कमी को पूरा कर लेता है तथा नए रक्त कोशिकाओं का निर्माण तेजी से होने लगता है। इससे शरीर की रक्त निर्माण प्रक्रिया सक्रिय रहती है और रक्त संचार भी बेहतर होता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों और भ्रांतियों से दूर रहकर नियमित रक्तदान करें।
जिले को रक्त के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की पहल
कलेक्टर ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रशासन द्वारा रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्षभर का विशेष कैलेंडर तैयार किया गया है। इसके तहत विभिन्न सामाजिक, राष्ट्रीय एवं विशेष अवसरों पर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य झाबुआ जिले को रक्त की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाना है ताकि किसी भी मरीज को रक्त की कमी के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों एवं युवाओं का सहयोग लिया जा रहा है।
युवाओं ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी
रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया। कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान कर दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बनने का कार्य किया। शिविर में उपस्थित नागरिकों ने रक्तदान को महादान बताते हुए भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान अस्पताल परिसर में स्थापित ब्लड डोनेशन काउंटर एवं विशेष ब्लड डोनेशन बस के माध्यम से व्यवस्थित रूप से रक्त संग्रह किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रक्तदाताओं को आवश्यक चिकित्सकीय जानकारी भी प्रदान की।
सभी से की रक्तदान अभियान से जुड़ने की अपील
अपने संबोधन के अंत में कलेक्टर डॉ. भरसट ने जिलेवासियों से स्वयं रक्तदान करने तथा अपने परिवार, मित्रों और परिचितों को भी इस पुनीत अभियान से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा दान है, जिससे किसी व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है और इससे बड़ा कोई परोपकार नहीं हो सकता।
इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) थांदला श्री भास्कर गाचले, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में रक्तदाता उपस्थित रहे।