मंदरी महोत्सव पर पर बड़ा विरोध, हिंदू युवा जनजाति संगठन ने सौंपा ज्ञापन, धर्मांतरण रोकने की मांग

हितेंद्र पांचाल/झाबुआ

झाबुआ जिले के थांदला क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों और मतांतरण को लेकर जनजातीय समाज में गहरा असंतोष दिखाई दे रहा है। सोमवार को हिंदू युवा जनजाति संगठन के बैनर तले सैकड़ों युवाओं ने अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में आयोजित चर्च कार्यक्रम को निरस्त करने की मांग उठाई।

5वीं अनुसूची क्षेत्र में उल्लंघन का आरोप

जनजातीय संगठन का कहना है कि थांदला झाबुआ जिला संविधान की 5वीं अनुसूची में आता है, जहां प्राचीन सांस्कृतिक परंपराएं व निर्णय लागू होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में मिशनरियों द्वारा मतांतरण के लिए किए जा रहे कार्यक्रम कानून के विरुद्ध बताए गए हैं। ग्राम डूंगरीपाड़ा में पलवाड़ी मां के नाम से बने चर्च पर भी गंभीर आरोप लगाए गए, जिसमें कहा गया कि यह जनजातियों की आस्था को तोड़ने और समाज को बांटने का काम कर रहा है।

सोशल मीडिया पर उग्र विरोध

सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर जनजातीय युवाओं ने दिनभर मिशनरियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। आरोप लगाया गया कि भोले-भाले जनजातियों को लालच देकर जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा है। पलवाड़ी क्षेत्र भील आबादी वाला इलाका है और वहां की विशिष्ट संस्कृति का उल्लंघन किया जा रहा है।

जनजाति समाज का आक्रोश

संगठन प्रमुख ने प्रशासन से पूछा कि जब जिले में कोई जनजाति समाज विधिक रूप से ईसाई नहीं है, तो चर्च में नौ दिन का नौवां पूजन विधि कार्यक्रम किसके लिए? यह तरीका जनजाति समाज को भ्रमित करने और बड़े स्तर पर धर्मांतरण की गहरी साजिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कार्यक्रम सनातन संस्कृति, परंपरा और रीति रिवाज को प्रभावित करते हैं।

कार्यक्रम निरस्त की मांग, आंदोलन की चेतावनी

संगठन ने मांग रखी कि 26 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले चर्च कार्यक्रम को तत्काल निरस्त किया जाए। अगर प्रशासन ने कार्यक्रम नहीं रोका तो आने वाले समय में जनजातिय समाज बड़ा आंदोलन करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की रहेगी। ज्ञापन के दौरान संगठन कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

यह मामला क्षेत्रीय स्तर पर तेजी से तूल पकड़ रहा है और भील जनजाति समाज अपनी संस्कृति, आस्था और अस्तित्व की रक्षा के लिए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है